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मंगलवार, 22 मार्च 2011

तेरी याद.....ओम कश्यप







आज मुझे फिर तेरी याद आई ,
दिल में बस तुम ही तुम समाई !
जिधर देखूं आये नज़र तेरी ही परछाई ,
इश्क में हमने ये कैसी सजा पायी !
आज मुझे फिर तेरी याद आई ,
यादों में इतना टूटते गए !
ज़ख्म और भी गहरे होते गए ,
जाकर किस वेध से मिले !
रास न आती कोई दवाई ,
कर लो चाहे जितने भी सितम !
हमने कसम हैं खायी ,
नहीं भूलेंगे तुझको चाहे चले पुरवाई !
आज मुझे फिर तेरी याद आई ,
कसमें खाई थी जो साथ जीने- मरने की !
वो तुमने क्यों नहीं निभाई ,
कब तक करती रहोगी ऐसी बेवफाई !
घुट-घुट के जी रहे थे दोस्त ,
अब तो जान पर बन आई !
आज मुझे फिर तेरी याद आई ,
कोई पैमाना नहीं बना जो माप दें !
इस बेजुबान दर्द की गहराई ,
हर पल सताती तुम्हारी याद में !
हमने ये कलम हैं उठाई ,
चंद लब्जो में लिख डाली अपनी तन्हाई !
आज मुझे फिर तेरी याद आई ,
दिल में बस तुम ही तुम समाई !!


चित्र :-( गूगल से साभार ) ♥♪♥ओम कश्यप ♥♪♥


गुरुवार, 17 मार्च 2011

सुना आँगन .....ओम कश्यप







आग लगी तन-मन पिया आन मिलो आँगन ,
सुना आज आँगन बिन तेरे मोरे साजन !
कुछ तो दे दो आने की खबरिया ,
दिल तडपे ऐसे जैसे बिन पानी के मछलिया !
ऐसी मुश्किल में कौन आये काम राम जाने ,
दिल को क्या सूझत है दिल ही जाने !
नैना भर आये जब भी पिया याद आये ,
साजन की याद तो पल-पल सताये !
कही हम न हो जाये बदनाम ,
कब होगा पिया से मिलना मेरे राम !
तीर तुमने चलाया दिल मेरा बना निशाना ,
पिया तुमने मेरे प्यार को नहीं जाना !
बना लो चाहे तुम कुछ भी बहाना ,
बिन तेरे हमको जीना नहीं चाहे पड़े मर जाना !
मर जायेंगे तेरे दीवाने शान से ,
हसर में फिर मिलेंगे आराम से !
आग लगी तन-मन पिया आन मिलो आँगन ,
सुना आज आँगन बिन तेरे मोरे साजन !!



♥♪♥OM . KASHYAP ♥♪♥

रविवार, 6 मार्च 2011

सिगरेट की जलन ... ओम कश्यप





सिगरेट खुद जलती है होटों को जलाती है ,
इसके शोखीनो से पुछो ये उनके गमो को मिटाती है !
कोई पीता है गम में तो कोई पीता फेशन में ,
वक़्त कुछ भी हो पीते हैं हर मौसम में !
परवाह न करते ये किसी बिमारी की ,
चाहे रकम लेनी पड़ जाये उधारी की !
सिगरेट खुद जलती है होटों को जलाती है ,
देखो यारो सिगरेट पीने वाले ऐसे भी होते ,
माचिस , बीडी पीने वालों से मांगकर सिगरेट पीते !
पुछो इन नशे के दलालों से ,
कैसे गुजरते है इन हालातो से !
खुद हो जाते है बेखबर ,
नहीं रहती रिश्ते-नातो की खबर !
सिगरेट खुद जलती है होटों को जलाती है
कुछ तो यारों ऐसे भी बदनसीब होते ,
जो छिपकर पखाने में भी पीते !
वाह रे चलाने वालो खूब चलाओ ये कारोबार ,
होने वाले तो होते ही जायेंगे बीमार !
सिगरेट खुद जलती है होटों को जलाती है ,
इसके शोखीनो से पुछो ये उनके गमो को मिटाती है !

चित्र :-
( गूगल से साभार )

बुधवार, 2 मार्च 2011

गावँ की यादें ... ओम कश्यप










गाँव चारों और
प्रकृति की छाँव ,
देखकर जिसको मचल जाता हे मन !
हवा ऐसी बहती तन भी रहता प्रसन्न ,
सुबह -सुबह को हसीं नज़ारा ,
ध्यान से जो निहारा !
अजब सी मस्ती पंछियों का गाना ,
ऐसा गाँव हमारा ,
वो हसीं वादियाँ और वो खुला आसमान !
फूलों की खुशबु झरनों की छन-छन ,
कोयल की को कु -कु-कु बुलबुल का गान !
यहाँ हर कोई करता हे बड़ों का सम्मान ,
गाँव चारों और प्रकृति की छाँव ,
जहा भी ये महान हैं जाते !
हर क्षेत्र में पहचान बनाते ,
मेहनत से नहीं ये घबराते !
गैरों को भी अपना बनाते ,
सब के दिलो में बस जाते !
खेतों में खून की तरह पसीना बहाते ,
धरती माँ से अन्न उगाते !
गाँव चारों और प्रकृति की छाँव ,
परवाह न करते गर्मी-सर्दी की
आये चाहे लाखों तूफ़ान ,
मेहनत सिर्फ मेहनत करना हैं इनकी शान !
वाह रे गाँव के वीरों कैसे करे तुम्हारा गुणगान ,
गांवो से ही बनता मेरा भारत महान !!




चित्र :-
( गूगल से साभार )